डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए फरवरी 2026 से यूपीआई से जुड़ा एक नया नियम लागू हो गया है। अगर आप रोज़मर्रा के लेनदेन के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए जानना बेहद जरूरी है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी National Payments Corporation of India (NPCI) ने यूपीआई पेमेंट सिस्टम में कुछ अहम बदलाव किए हैं, जिनका असर खास तौर पर बड़े ऑनलाइन भुगतानों पर पड़ेगा।
यूपीआई नियमों में क्या बदलाव किया गया है
नए नियमों के अनुसार, अब 2,000 रुपये से अधिक के वॉलेट-आधारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाया जाएगा। यह चार्ज 1.1 प्रतिशत तक हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह अतिरिक्त शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, बल्कि मर्चेंट यानी दुकानदार या सेवा प्रदाता को वहन करना होगा। इसका मतलब है कि आम यूज़र को यूपीआई पेमेंट करते समय कोई अलग से पैसा नहीं देना पड़ेगा।
किन ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज
यह नया चार्ज केवल उन भुगतानों पर लागू होगा जो डिजिटल वॉलेट के जरिए किए जाते हैं। अगर कोई ग्राहक PhonePe, Google Pay या अन्य यूपीआई ऐप में वॉलेट बैलेंस का इस्तेमाल करके 2,000 रुपये से ज्यादा की खरीदारी करता है, तो उस स्थिति में मर्चेंट पर चार्ज लगेगा। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सामान्य यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
यूपीआई की लिमिट और नए बदलाव
यूपीआई ट्रांजैक्शन की सामान्य दैनिक सीमा अभी भी 1 लाख रुपये बनी हुई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बीमा और आईपीओ जैसे विशेष क्षेत्रों में यह सीमा 5 लाख रुपये तक है। फरवरी 2026 से कुछ चुनिंदा श्रेणियों में P2M यानी व्यक्ति से मर्चेंट भुगतान की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। इसके अलावा, ज्यादातर बैंक एक दिन में लगभग 20 यूपीआई ट्रांजैक्शन की अनुमति देते हैं।
आम यूज़र्स के लिए क्या है सही तरीका
अगर आप चार्ज से बचना चाहते हैं, तो कोशिश करें कि 2,000 रुपये से कम की राशि का भुगतान करें या सीधे बैंक अकाउंट से यूपीआई ट्रांजैक्शन करें, न कि वॉलेट बैलेंस से। NPCI का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य यूपीआई सिस्टम को ज्यादा तेज, सुरक्षित और बड़े लेनदेन के लिए सक्षम बनाना है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में एक कदम
हालांकि यह बदलाव करोड़ों यूज़र्स और मर्चेंट्स को प्रभावित करेगा, लेकिन इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। बड़े ट्रांजैक्शन अब ज्यादा आसानी से किए जा सकेंगे और यूपीआई सिस्टम लंबे समय में और बेहतर होगा।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यूपीआई से जुड़े नियम, चार्ज और सीमाएं NPCI या बैंकों द्वारा समय-समय पर बदली जा सकती हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले संबंधित बैंक या आधिकारिक NPCI दिशानिर्देश अवश्य जांचें।









